गंगनाथ बाबा (Gangnath Devta) कुमाऊं की प्रसिद्ध लोक कथा

गंगनाथ बाबा की कथा कुमाऊ क्षेत्र में बहुत प्रचलित है गंगनाथ बाबा नेपाल के एक छोटे से गांव डोटीगढ़ रहते थे I पिता राजा वैभव चंद्र और उनकी माता का नाम फूला देवी था I ज्योतिषी ने उनके बारे में पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वह एक बलशाली सन्यासी बनेगा I

गंगनाथ बाबा का परिचय

नेपाल कि गांव डोटीगढ़ के राजा वैभव चंद्र और उनकी पत्नी का नाम प्यूला देवी था। उनकी कोई संतान नहीं थी। इसी कारण वह काफी परेशान रहते थे। संतान न होने पर उन्होंने भगवान शिव की आराधना की । इसके बाद उनके एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई।

बच्चों की कुंडली देख ज्योतिषों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह आपका पुत्र राजा नहीं बल्कि एक बलशाली सन्यासी बनेगा। बालक का नाम गंगाचंद्र रखा गया। राज्य में बहुत ही खुशियां मनाई गई। गीत गाए गए। गाने बजाने हुए।धीरे-धीरे बालक बड़ा होने लगा।

गंगनाथ बाबा की कथा

बच्चों की तेज और क्रियाकलापों से सिद्ध हो जाता था कि की बच्चा बेहद ही तेजस्वी है। जैसे-जैसे गंगाचंद्र बड़ा होने लगता है।उनके संग अलग-अलग अजीबो घटनाएं घटने लगती है। उन्हें हर दिन सपने में अल्मोड़ा स्थित जोशी खोला की एक कन्या जिसका नाम भाना होता है। वह सपने में रोज आकर बोलती थी ।

गंगनाथ बाबा
गंगनाथ बाबा

उन्हें अल्मोड़ा जोशी खोला आकर ले जाए। उसे अपने इस सपने की वजह से वह बहुत परेशान रहने लगे उनके मन में बहुत सवाल आए। लेकिन रोज उनके सपने में रूपभाना आकर बोलती थी

ज्यूंन मैं को च्यल हौले, जोशी खोला आले। मरी माँ को व्यल हेले, डोटी पड़ी रोले।।

अर्थात अपनी मां का लाल है ,तो जोशी खोला आकर मुझे मिल, नहीं पड़े रहना अपने डोटीगढ़ में।
गंगाचंद्र की नींद खुल जाती थी। गंगाचंद्र एक रात सब छोड़-छाड़ करके राज्य से चले जाते हैं। अपने पिता का घर छोड़कर ,सभी राज काज छोड़ दिया।

जिससे उनकी मां और पिता दोनों बहुत ही दुखी हुए। गंगाचंद्र अपना राज्य छोड़कर अपने सवालों का जवाब पाने के लिए जगह-जगह भटकने लगे और जाते-जाते वह काली नदी के पास पहुंचे।काली नदी के पास गंगाचंद्र पर काली नदी का मसाण हमला कर देता है।

गंगाचंद्र मसाण का सामना नहीं कर पाते हैं। दुख होकर भामा को याद करते हैं। इतने वहां भगवान गौरैया (गोलूदेवता) आते हैं और गंगाचंद्र को दिव्य शक्ति प्रदान करते हैं। उन दिव्य शक्तियों के सहारे गंगाचंद्र मसाण को हरा देते हैं और भगवान गोरिया के चरण पकड़ लेते हैं।

उन्हें अपने मन की बात सुनते हैं।भगवान गौरैया गंगाचंद्र की बात सुनकर गंगाचंद्र को गुरु गोरखनाथ के चरणों में जाने को कहते हैं। गोलू देवता को अपना भाई बना कर। वह गुरु गोरखनाथ की खोज में निकल जाते हैं। तब उन्हें हरिद्वार के जंगलों में गुरु गोरखनाथ जी के दर्शन हुए।

पहले तो गोरखनाथ जी ने गंगाचंद्र को अपना शिष्य बनने से इनकार कर दिया। लेकिन बाद में बालक ज़िद के आगे हार मानते हुए गंगाचंद्र को अपना शिष्य बनने को तैयार हो गए‌। गंगाचंद्र की शिक्षा दीक्षा पूरी करने के बाद गंगाचंद्र को विद्या, तंत्र-मंत्र, ज्योतिष विज्ञान सीखकर उन्हे गंगा चंद्र से गंगनाथ बाबा बना देते हैं।

गंगनाथ बाबा अपने गुरु को भी अपने मन की व्यथा बताते हैं।बोलते हैं। हे ! गुरु हमारा बाट सुझाव अर्थात मुझे मार्ग दिखाओ। गुरु गोरखनाथ बोलते हैं, तुम अपने रास्ते में चलते जाओ समय आने पर तुम्हें सब पता चल जाएगा।

गुरु गोरखनाथ जी की शिक्षा दीक्षा प्राप्त करने के बाद गंगनाथ बाबा अपने घर पहुंच कर अपनी मां से भिक्षाटन करते हैं।उन्हें अपने माता-पिता, उन्हें अपने राज्य मे वापस आने के लिए बहुत समझते हैं लेकिन गंगनाथ बाबा नहीं मानते। वह कहते हैं कि मुझे अपना मार्ग मिल गया है। मुझे मत रोको।

कुछ दिन डोटीगढ़ में भिक्षाटन करते-करते वह काली नदी पार कर के वर्तमान चंपावत जिले में आते हैं। यहां पर गंगनाथ बाबा अपनी तिमिर की लट्ठा ,झोली ,चिमटी और अपने मनमोहन जोयां मुरली लेकर देवीधुरा मां विराही के मंदिर में आ जाते हैं।

वहां वह माता की पूजा अर्चना करके पेड़ों की छाया में आसन लगाकर आराम करते हैं। गंगनाथ बाबा को देखकर सभी लोग मोहित और आश्चर्यचकित हो जाते हैं। इतना तेजस्व जोगी क्षेत्र में पहली बार देखते है। गंगानाथ अल्मोड़ा क्षेत्र के आसपास पहुंच जाते हैं।

अलख निरंजन की अलग जगा कर, लोगों का आकर्षण का केंद्रीय बन जाते हैं। लोग क्षेत्र में ऐसे तेजस्वी योगी को देखकर अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर उनके पास आते हैं।बाबा गंगानाथ सभी की समस्याओं का निवारण करते हैं।

गंगनाथ बाबा
गंगनाथ बाबा

अपनी ज्योतिष विद्या से सब की परेशानियों को का हाल देते हैं। अपनी विद्याओं से दुष्टो को दंड देते हैं। भाई गौरैया के द्वारा दी गई दिव्य शक्तियों से बड़े-बड़े बेताल, शैतान और मसाण को हरा कर के लोगों को शांति और सुखी जीवन प्रदान करते हैं। लोग उनका गुण गान गाने लगते हैं।

लेकिन गंगानाथ को अभी सुकून नहीं मिला।उन्हें रोज सपने में वही औरत आकर बुलाती और उनको बोली मरती है अर्थात ताने मारती रहती है।भगवान गंगानाथ जी को बोली नहीं पसंद है मतलब उनको ताने बिल्कुल भी नहीं पसंद।

इसी सपने के कारण गंगानाथ एक स्थान पर धोनी नहीं रामा पा रहे थे और परेशान होकर अपनी जोयां मुरली बजाते रहते गांव गांव घूमते रहते। गंगानाथ बाबा घूमते घूमते लोगों का कल्याण करते हुए जोशी खोला पहुंच गए।

वहां जाकर उन्हें कुछ महिलाएं मिली। जिन्हें गंगा नाथ बताते हैं कि वह नेपाल डोटी राज्य के राजकुमार गंगाचंद्र है। ‌जोशी खोला की रुपसी भाना के स्वप्न आमंत्रण पर उसको ढूंढने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

तब महिलाएं बोली रुपसी भाना आपका इंतजार में कब से पलके बिछाए बैठी है। वह रोज आपका रास्ता देखते हैं और बोलती है” मेरे गंगू आएंगे मुझे मिलने एक दिन ” यह सुन गंगानाथ भाव विभोर हो जाते हैं और उनसे बोलते हैं कि क्या आप मुझे भाना के गांव ले जा सकती है ।

औरतों ने उन्हें अपने साथ ले जाकर भाना के गांव ले जाती हैं। गंगनाथ बाबा को गांव के मंदिर में रोक देती है। फिर वह औरतें भाना के पास जाती है। भाना को बताते हैं कि एक तेजस्वी जोगी आए हैं और वह अपने आप को डोटी गांव का राजकुमार गंगाचंद्र बता रहा है और वह बता रहा है कि अपनी प्रिय रूपसी भाना से मिलने आये है।

यह सब सुनते ही भाना की आंखों में चमक आ गई ।वह बहुत खुश हुई।महिलाओं से प्रार्थना करती है कि मुझे उसे तेजस्वी योगी के पास ले चलो। यदि वह मेरे सपनों के राजकुमार होंगे। तो मैं उन्हें पहचान लूंगी। मंदिर में जाते ही भाना गंगनाथ को पहचान लेती है।दोनों प्रेमियों का मिलन होता है।

दोनों प्रेमी बातें करते हुए अपने अतीत में खो जाते हैं। दोनों हंसते खेलते हैं और दोनों प्रेमी मीठी-मीठी बातें करके अपने भविष्य के सपने बुनते हैं।दोनों को हंसते खेलते देख, हाथों में हाथ डालते रोज अपने प्रेम को आगे बढ़ते हैं।

गंगा चंद्र जोशी खोला के पास कुटिया डालकर रहना शुरू कर देते हैं। गंगनाथ बाबा की सेवा के लिए झपरूवा लोहार को रख देते हैं। झपरूवा अपने सेवा से गंगनाथ को खुश कर देता है। धीरे-धीरे झपरूवा गंगानाथ का खास बन जाता है।

धीरे-धीरे भाना और गंगनाथ बाबा का प्रेम बढ़ता जाता है। दोनों का रोज मिलने का सिलसिला शुरू हो जाता है।यह खबर सारे गांव में फैल जाती है। किशन जोशी को यह भी खबर पता चल जाती है।तो वह बेहद ही गुस्से हो जाते हैं।

किशोर जोशी दीवान बहुत कठोर होते हैं।वह अपने सेवको के संग गंगनाथ बाबा को मारने की योजना बनाते हैं। उनको पता चलता है कि गंगानाथ के पास गुरु गोरखनाथ के दिए दिव्य वस्त्र हैं।भाई गौरैया की दी हुई दिव्य शक्ति और गंगनाथ का जन्म महादेव के आशीर्वाद से हुआ है

इसलिए उनके सामने लड़ाई जितना मुश्किल है।वह गंगनाथ बाबा को छल से मारने की योजना बनाते हैं। किशन जोशी और उनके सेवक होली के दिन अपनी योजना के अनुसार गंगनाथ जी के जल में भांग मिला देते हैं। अत्यधिक भांग पीने के कारण वह बेहोश हो जाते हैं।

इसी समय का लाभ उठाकर किशन जोशी और उनके सेवक गंगनाथ के दिव्य वस्त्र निकाल के अलग कर लेता है और गंगनाथ जी की हत्या कर देते हैं। उनके सेवक झपरूवा और प्रेमिका भाना उनको बचाने की बहुत कोशिश करते हैं।

गंगनाथ बाबा
गंगनाथ बाबा

जब झपरूवा उनको छुपा देता है और झपरूवा गंगानाथ को बचाने की कोशिश के जुर्म में गांव वाले झपरूवा को मार देते हैं। कहते हैं भाना उस समय गर्भवती होती है। गंगनाथ की हालत देखकर भाना ब्राह्मणी कुपित हो जाती है और रोते-रोते श्राप देती है कि यह अंचल सुख जाए।

यहां का विनाश हो जाए।किशन जोशी और गांव वाले उसे भी मार देते हैं। तीनों के मर जाने के बाद , तीन दिन बाद गांव में हल्ला हो जाता है। गाय की बच्चे मरने शुरू हो जाते हैं। जोशी खोला के लोग बीमार और पागल होना शुरू हो जाते हैं।

पूछ पूछहरि करने के बाद पता चलता है कि भाना, गंगनाथ , झपरूवा की आत्मा यह सब कर रही है। फिर जागर लगाई जाती है।तीनों का अवतार होता है।जोशीखोला के लोग दंडवत बाबा गंगनाथ के चरणों में गिर माफी मांगते हैं। तब गंगा देवता आंखों से आंसुओं और मुस्कान एक साथ लाकर कहते हैं।

“रे सोकार ! मेरी के गलती छि, म्यर तो पुर परिवार उजाड़ दे !!! मी गंगनाथ छि रेगंगनाथ! खुशी हुनु तो, फुते फुलारी करि दिनु । नाराज ह्वे गयो तो, शमशान कर दिनु रे । “

बड़ी मुश्किल से मनौती करके उन तीनों को गांव वाले शांत करते हैं और उनके मंदिर की स्थापना की जाती है। मंदिर में बाबा गंगनाथ देवता और भावना ब्राह्मणी और उनके पुत्र बाल रूप में पूजा की जाती है।

साथ में गंगनाथ बाबा के सेवक का झपरूवा का मंदिर बनाकर उनकी पूजा की जाती है। गंगनाथ बाबा अल्मोड़ा आंचल के लोक देवता है। अल्मोड़ा क्षेत्र के आसपास के गांव में गंगनाथ के देवता के रूप में पूजा जाता है‌। अल्मोड़ा क्षेत्र में उनके कई मंदिर है।

अल्मोड़ा में चार-पांच किलोमीटर दूर तालुका में उनके मंदिर है‌। गंगनाथ देवता लोग कल्याणकारी देवता है। जो कोई दुखिया उनके शरण में जाता है ।उसका कल्याण वह अवश्य करते हैं। गंगनाथ बाबा अकेले ऐसे देवता है, जिन्हें बुलाने के लिए केवल हुड़का बजाया जाता है।

आज भी बाबा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं तथा उनकी परेशानियों को दूर करते हैं।आज भी बाबा के अलग-अलग मंदिरों में वहां के पुजारी पर बाबा शरीर में प्रवेश करते हैं तथा चावल देखकर पूछ करते हैं। जिसमें लोगों की दुख समस्या का निवारण बताते हैं तथा उनका खुशी जीवन प्रदान करते हैं।

दुष्ट लोगों को आज भी बाबा दंड देते हैं। जो भी बाबा के शरण में जाता है, बाबा उसका दुख अवश्य दूर करते हैं। चाहे परेशानी किसी भी प्रकार की क्यों ना हो। भूत, पिशाच, मसाण, शैतान, जादू, तंत्र मंत्र किसी भी प्रकार का कोई दुख हो उसका बाबा निवारण जरूर बताते हैं।

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